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Barshahi Jalad, इस कविता का केंद्
Barshahi Jalad, इस कविता का केंद्रीय भाव यह है कि प्रकृति हमें जीवन की महत्वपूर्ण नैतिक सीख देती है। कवि ने वर्षा ऋतु के माध्यम से समाज में सज्जन और दुर्जन व्यक्तियों के व्यवहार को दर्शाया है। ‘बरषहिं जलद’ यह रचना रामचरितमानस का एक अंश है। रामचरितमानस के किष्किंधा कांड से यह रचना ली गई है। वर्षा का समय है। प्रकृति वर्षा के स्वागत के लिए उत्सुक Std 10 Hindi Chapter 1 Barshahi Jalad Question Answer Maharashtra Board Balbharti Maharashtra State Board Class 10 Hindi Solutions Lokbharti बरषहिं जलद, class 10 hindi chapter 1 barshahi jalad swadhyay, 1 barshahi jalad, class 10 hindi chapter 1, class 10th hindi chapter 1 question answer, बरषहिं जलद Get free Balbharati Solutions for Hindi Lokbharati [English] Standard 10 Maharashtra State Board Chapter १ बरषहिं जलद solved by experts. Available here are Chapter १ - बरषहिं जलद Exercises ज्ञानयात्री तंत्रस्नेही शैक्षणिक संकेतस्थळाची गगन भरारी भारतासह अमेरिका,इंग्लंड,चीन,सिंगापूर,म्यानमार,जपान,सौदीअरेबिया,रशिया व इतर ३०० देशा मध्ये दाखल तीन Hindi Lokbharti Dasvin kakshaDusari IkaiKavita Barshahi JaladBhavarthबरषहिं जलद , गोस्वमी तुलसीदास , रामचरतिमानस चौपाई बरषहिं जलद भूमि निअराएँ। जथा नवहिं बुध बिद्या पाएँ। बूँद अघात सहहिं गिरि कैसे। खल के बचन संत सह जैसें॥2॥ कभी-कभी वायु बहुत तेज गति से चलने लगती है। इससे बादल यहाँ-वहाँ गायब हो जाते हैं। यह दृश्य उसी प्रकार लगता है जैसे परिवार में पुत्र के उत्पन्न होने से कुल के उत्तम प्रथम चार पंक्तियों का भावार्थ प्रभुराम अपने छोटे भाई लक्ष्मण से कह रहे है कि ये देखो इस आसमान मे कितना भयंकर रूप प्राप्त किया है बादल कितने जोरो से गरज रहे है और इस वक्त मेरी प्रिया .
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